Girl Child EmpowermentM¤ जयपुर। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘लाडो प्रोत्साहन योजना’ अब नई दिशा में कदम बढ़ाने जा रही है। पहले यह योजना केवल राजकीय विद्यालयों की बालिकाओं तक सीमित थी, लेकिन अब मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं को भी इसका लाभ मिलेगा। इस बदलाव से हजारों बालिकाओं को शिक्षा के साथ आर्थिक सशक्तिकरण का अवसर मिलेगा। सरकार ने इसके लिए महिला अधिकारिता, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में जिलास्तरीय आमुखीकरण कार्यशालाएं आयोजित करने की योजना बनाई है, ताकि सभी विद्यालयों को प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी दी जा सके।
इन्हें मिलेगा योजना का लाभ
लाडो योजना के तहत उन बालिकाओं को डेढ़ लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है, जिनका जन्म किसी सरकारी या सरकार से अधिकृत चिकित्सा संस्थान में हुआ हो। यह राशि सात किश्तों में सीधे अभिभावकों के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है। योजना का उद्देश्य बालिकाओं को जन्म से लेकर शिक्षा तक प्रोत्साहन देना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

होंगी कार्यशालाएं
हालांकि, शैक्षणिक वर्ष 2024-25 से निजी विद्यालयों को भी योजना से जोड़ने की घोषणा के बाद भी इसकी प्रगति अपेक्षित नहीं रही। कई स्तरों पर प्रक्रिया की धीमी गति को देखते हुए अब सरकार ने समीक्षा और प्रशिक्षण की दिशा में यह बड़ा कदम उठाया है। कार्यशालाओं के माध्यम से नोडल अधिकारियों और शिक्षकों को आवेदन से लेकर भुगतान प्रक्रिया तक की पूरी जानकारी दी जाएगी।
आमुखीकरण कार्यशालाओं में जिले के सभी राजकीय व निजी मान्यता प्राप्त विद्यालयों के नोडल अधिकारी, पीईईओ, यूसीईईओ और सीबीईईओ कार्यालयों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। कार्यशाला में प्रतिभागियों को शाला दर्पण पोर्टल पर आवेदन भरने, दस्तावेज अपलोड करने, आवेदन लॉक करने और भुगतान की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस पहल से सरकार को उम्मीद है कि योजना का लाभ अब अधिकाधिक बालिकाओं तक पहुंच सकेगा। लाडो योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि बेटी के जन्म से लेकर उसकी शिक्षा तक सम्मान और सुरक्षा की भावना को भी मजबूत करती है।

श्रवण कुमार ओड़ जालोर जिले के सक्रिय पत्रकार और सामाजिक विषयों पर लिखने वाले लेखक हैं। वे “जालोर न्यूज़” के माध्यम से जनहित, संस्कृति और स्थानीय मुद्दों को उजागर करते हैं। उनकी पत्रकारिता का उद्देश्य है—सच दिखाना और समाज की आवाज़ बनना।






